मौत खड़ी थी उनके सर, इसी इंतजार में
की कब ले जाएं उनकी साँसे, अपने हिंदुस्तान से
*कह दिए लेकिन वो भी*
ना झूकेगा ध्वज मेरे वतन का
15 अगस्त के अवसर पर,
तू ठहर इंतजार कर ,
लहराने दे बुलंद इसे, मैं एक दिन और लड़ूंगा
मौत तेरे आलम से|
मंजूर नही था कभी उन्हें
झुके तिंरगा स्वतंत्रता के अवसर पर। 🙏🏼🙏🏼
की कब ले जाएं उनकी साँसे, अपने हिंदुस्तान से
*कह दिए लेकिन वो भी*
ना झूकेगा ध्वज मेरे वतन का
15 अगस्त के अवसर पर,
तू ठहर इंतजार कर ,
लहराने दे बुलंद इसे, मैं एक दिन और लड़ूंगा
मौत तेरे आलम से|
मंजूर नही था कभी उन्हें
झुके तिंरगा स्वतंत्रता के अवसर पर। 🙏🏼🙏🏼
2 comments:
Had to read it twice to understand the actual meaning ..
Never knew u cud write hindi also so well !!!
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